कोरोना काल में चरित्र
कोरोना 2 ने सिद्ध कर दिया कि मैकाले शिक्षा प्राप्त हम लोग (जो कर्तव्य छोड बस अधिकार की बात ही करते हैं) 74 साल बाद भी भारत के नागरिक नहीं बल्कि गिरोह हैं उठाईगीरौं,कालाबाजारी,जमाखोरों,लुटेरों, हृदयहीनौ, रक्तपिपासु,उत्पीडकौं हत्यारों के, जो मानवीय आपदा और यंत्रणा को मौका समझ इंतजार करते हैं, सत्ता पाने का पैसा कमाने का प्रभाव बढाने का दूसरे को नीचा दिखा खुश होने का नागरिक हितैषी सरकारी सलाह न मानने का उत्पात मचाने का लोगौं को भ्रमित कर उनकी जिंदगी से खेलने का और इसके लिये इन गिरोहौं को जीवन रक्षक दवाऔ, आक्सीजन, अस्पताल बैड की कालाबाजारी , नकली दवा बेचने, टीका लेने से डराने,आवशयक चीज़ों की चोरबजारी, एम्बुलेंस व अस्पताल किराया लूट आदि कितने ही राक्षसी कामौं से परहेज नहीं था। यह सब हत्यारे और मौतों के व्यापारी हैं और इनके कामों में इनके परिवार बराबर के साझीदार हैं । संदेश साफ है सरकार के लिये, जो सलाह मनुहार प्रेम से नागरिक बनने और कर्तव्य निभाने को तैयार नहीं उन लोगौं और...